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जाने कितनी दुर है मंजिल

जाने कितनी दुर है मंजिल

–“ढल गई है राते ढल्ते ढल्ते, बुझ गई सामे जल्ते जल्ते”– “जाने कितनी दुर है मंजिल, थक गये हम युही चलते चलते” ––––––––––––––––––––––––––––...

 
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